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“राजगीर मलमास मेला 2026″ — संजीव कुमार ने बताया ज़मीनी हाल
वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार ने बताया कि जब वे गिरियक रोड क्षेत्र में पहुँचे, तो वहाँ कुछ महिलाएँ और एक छोटी बच्ची सड़क किनारे बैठी थीं। बातचीत के दौरान महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पानी लेकर आई हैं क्योंकि आसपास पीने के पानी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।
संजीव कुमार के अनुसार, एक बुज़ुर्ग महिला ने उनसे कहा,
“तालाब का पानी पीने लायक नहीं है। अगर सरकार यहाँ नल या प्याऊ लगवा देती तो लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती।”
पत्रकार ने कहा कि यह दृश्य देखकर उन्हें एहसास हुआ कि मेले की तैयारियों के बीच सबसे बुनियादी सुविधा — पीने का पानी — भी लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
मेला क्षेत्र में अधूरी तैयारियाँ, सड़क और सफ़ाई की खराब स्थिति
संजीव कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मेला क्षेत्र की तैयारियाँ अभी अधूरी दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें टूटी हुई हैं और सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है। मेन बाज़ार और राजगीर मोड़ के आसपास गंदगी फैली हुई मिली।
उन्होंने कहा कि लाखों श्रद्धालुओं के आने से पहले यदि सफ़ाई और पानी की व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कॉलेज रोड क्षेत्र का भी निरीक्षण किया, जहाँ पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं लगी।
“राजगीर जैसे धार्मिक शहर में ऐसी स्थिति चिंताजनक है”
संजीव कुमार ने कहा कि राजगीर सिर्फ़ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे धार्मिक और पर्यटन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने भी उनसे अपनी परेशानियाँ साझा कीं। कई लोगों ने कहा कि मेले के दौरान पानी, शौचालय और रुकने की समस्या और बढ़ जाएगी।
ई-रिक्शा चालकों और स्थानीय लोगों ने भी जताई चिंता

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पत्रकार संजीव Kumar ने कई ई-रिक्शा चालकों और स्थानीय व्यापारियों से बातचीत की। उनका कहना था कि वर्षों से सड़क और पानी की समस्या बनी हुई है। एक चालक ने बताया कि मेले के दौरान भीड़ बढ़ने पर हालात और मुश्किल हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द अतिरिक्त स्टैंड-पोस्ट, सफ़ाई अभियान और यात्री सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
मलमास मेला 2026 क्यों है महत्वपूर्ण?
राजगीर का मलमास मेला बिहार का एक प्रमुख धार्मिक आयोजन माना जाता है। अधिकमास के दौरान लाखों श्रद्धालु यहाँ स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुँचते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में राजगीर के कुंडों में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
इसी वजह से हर बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ आते हैं और प्रशासन पर बेहतर व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।
❓ राजगीर मलमास मेला 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. क्या राजगीर में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था है?
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल कई क्षेत्रों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखाई दी। स्थानीय लोग अतिरिक्त स्टैंड-पोस्ट लगाने की मांग कर रहे हैं।
2. मलमास मेला 2026 कब शुरू होगा?
धार्मिक पंचांग के अनुसार मलमास मेला मई 2026 से शुरू होने की संभावना है। प्रशासन जल्द आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर सकता है।
3. क्या मेला क्षेत्र की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं?
ग्राउंड रिपोर्ट में कई स्थानों पर अधूरी तैयारियाँ, टूटी सड़कें और सफ़ाई की समस्या सामने आई है।
4. प्रशासन की ओर से क्या प्रतिक्रिया मिली?
अब तक प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
5. श्रद्धालुओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
अपने साथ पीने का पानी, आवश्यक दवाइयाँ और यात्रा संबंधी ज़रूरी सामान लेकर जाएँ। होटल और यात्रा की बुकिंग पहले से कर लें।
निष्कर्ष: “आस्था के मेले में बुनियादी सुविधाएँ भी जरूरी”
वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार का कहना है कि राजगीर मलमास मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान भी है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि श्रद्धालुओं को पानी, सफ़ाई, सड़क और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएँ समय पर उपलब्ध कराई जाएँ।
उन्होंने कहा कि मीडिया का उद्देश्य केवल ख़बर दिखाना नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ को प्रशासन तक पहुँचाना भी है। उम्मीद की जा रही है कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद प्रशासन जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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